NATO किस तरह का संगठन है,नाटो की स्थापना की जरूरत क्यों पड़ी, नाटो की स्थापना कब हुई ? नाटो का सिद्धांत और उद्देश्य

 


 

              

 North Atlantic treaty     organisation

यह एक  military alliance है वर्ल्ड वार ll के बाद इसे बनाया गया था वर्तमान में इसके 30 सदस्य देश हैं

 यह एक अंतः सरकारी संगठन है

बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में इसका मुख्यालय है 

नाटो के अनुच्छेद 5 के मुताबिक इस संगठन में शामिल सभी देश सामूहिक रक्षा के सिद्धांत पर कार्य करते हैं यानी नाटो संगठन किसी सदस्य देश के ऊपर हमला करने का मतलब है कि इसमें शामिल कुल 30 देश पर हमला करना 


द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ जैसे देश महाशक्ति बनकर सामने आए यूरोप में सोवियत संघ के खतरे को देखते हुए ब्रिटेन, बेल्जियम , और लक्जमबर्ग ने एक ब्रुसेल्स की संधि की इस संधि में यह तय हुआ यदि इन देशों में से किसी भी देश पर हमला होता है तो ब्रुसेल्स संधि में शामिल सभी देश एक दूसरे को सामूहिक सैनिक सहायता सामाजिक आर्थिक सहयोग देंगे


1948 में सोवियत संघ ने जब बर्लिन की नाकेबंदी की तो पश्चिमी यूरोपीय पूंजीवादी देशों को साम्यवाद के प्रसार का भय लगने लगा इसके बाद अमेरिका ने सोवियत संघ की घेराबंदी और साम्यवादी विचारधारा के प्रभाव को समाप्त करने और सीमित करने के लिए सैन्य गुट बंदी शुरू की इसके जवाब में सोवियत संघ ने वरसा पैक्ट किया

वरसा संधि

यह संधि यूरोप में नाटो संधि में शामिल देशों का मुकाबला करने के लिए सोवियत संघ द्वारा यूरोप के कुछ देशों के साथ मिलकर बनाया गया नाटो जैसा ही सैन्य गुट  था इसकी स्थापना 1955 में मॉस्को में की गई थी


इससे शस्त्रीकरण को बढ़ावा मिला जिसके कारण अमेरिका और सोवियत संघ के संबंधों में तनाव बढ़ता गया अंततः अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर 15 के तहत उत्तर अटलांटिक संधि का प्रस्ताव पेश किया जिस पर 4 अप्रैल 1949 में फ्रांस, बेल्जियम, लक्जमबर्ग, ब्रिटेन नीदरलैंड, कनाडा, डेनमार्क, , इटली, नॉर्वे ,पुर्तगाल और संयुक्त राष्ट्र अमेरिका सहित 12 देशों ने हस्ताक्षर किए बाद में यूनान टर्की पश्चिमी जर्मनी और स्पेन जैसे देशों ने भी इसकी सदस्यता ली बाद में शीत युद्ध समाप्त होने के बाद पोलैंड, हंगरी और चेक गणराज्य देश भी इसमें शामिल हो गए 

      नाटो के उद्देश्य

  •  राजनीतिक और सैन्य मदद
  • सदस्य राष्ट्रों की स्वतंत्रता और सुरक्षा की गारंटी
  • सदस्य देशों के बीच एकजुटता और सामंजस्य की भावना पैदा करना
  • यूरोप में व्यक्तिगत आजादी लोकतंत्र और  मानव अधिकार 
  •  समुद्र तटों की रक्षा करना तथा सदस्य देशो मे  आतंकवाद को न बढ़ने देना उद्देश्य शामिल है।

     नाटो के कार्य
  •  नाटो आतंकवाद की समस्या से निपटने के लिए नई क्षमताओं और प्रौद्योगिकी का विकास करना
  •  लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देना 
  •  शांतिपूर्ण तरीके से विवादों को हल करना
  •  सामूहिक सुरक्षा प्रदान करना
  •  संकट का प्रबंधन और सहयोगी सुरक्षा निशस्त्रीकरण, हथियारों के नियंत्रण और इसके अप्रसार के लिए संकल्पबद्ध है
     NATO की संरचना
इसके तहत होने वाले उत्तर अटलांटिक परिषदों की बैठक की अध्यक्षता महासचिव द्वारा की जाती है इन बैठकों में लिए जाने वाले निर्णय सर्व सहमति के आधार पर होते हैं यहां बहुमत के माध्यम से कोई निर्णय नहीं लिया जाता है


NATO के अंग

  • महासचिव (secretary general) जो कि नाटो का सर्वोच्च अंग है इसकी मंत्री स्तरीय बैठक वर्ष में एक बार होती है इसमें सदस्य देशों के सिविल सर्वेंट शामिल होते हैं
  • परमाणु योजना समूह (Nuclear planning group) परमाणु योजना समूह के पास परमाणु नीति के मुद्दों के संबंध में उत्तरी अटलांटिक परिषद के समान अधिकार हैं
  • सैन्य समिति (military committee) इसका मुख्य कार्य नाटो परिषद एवं उसकी प्रतिरक्षा समितियों को सलाह देना है इसमें सदस्य देशों के सेना अध्यक्ष शामिल होते हैं
  • उप समितियां (subordinate committee)यह परिषद नाटो के सदस्य देशों द्वारा नियुक्त कूटनीतिक प्रतिनिधियों की परिषद है यह नाटो संगठन से सम्बद्ध सामंजस्य हितों वाले विश्व पर विचार करते हैं
इस तरह हम कह सकते हैं कि नाटो अपने सदस्य देशों के हितों के लिए राजनीतिक और सैन्य कार्यवाही के लिए प्रतिबद्ध है हालांकि इस संगठन पर अमेरिका के दबाव के चलते संगठन के मूल मकसद को पूरा करने में मुश्किलें आती रहती हैं

नाटो के वर्तमान सदस्य देश
BELGIUM ,CANADA ,DENMARK ,FRANCE ,ICELAND 
ITALY ,LUXEMBOURG ,NETHERLANDS 
NORWAY ,PORTUGAL ,THE UNITED KINGDOM 
THE UNITED STATES -(1952)

 GREECE ,TURKEY-(1952)

GERMANY (1955)

SPAIN (1982)

CZECH REPUBLIC ,HUNGARY, POLAND- (1999)
BULGARIA, ESTONIA ,LATVIA 
LITHUANIA, ROMANIA 
SLOVAKIA, SLOVENIA -(2004)

ALBANIA ,CROATIA -(2009)

MONTENEGRO- (2017)

NORTH MACEDONIA- (2020)

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